Wednesday, June 9, 2010

चंद शब्द

ए जिंदगी ऐसे मोड़ पे खड़ा हूँ
की हर तरफ रास्ते ही रास्ते दीखते है
कौन सा चुनु वो रास्ता
जो मुझे तेरी और ले जाए


हजारों सपनों की बीच एक सपना मेरा भी
रात भर पहरेदारी पर हूँ की कहीं
टूट ना जाये

नाम में क्या रखा है
हर तरफ बदनाम है शराब
माना की जिगर जलाती है पर गम भी तो जलते है
ख़राब ही सही
पर शराब  जिंदगी जीना आसां करती  है

लोग कहते है हमारी नज्म में प्यार नहीं छलकता
कैसे बताएं उनको की
आज भी हम आपके उस "हाँ " का इंतज़ार कर रहे है




Tuesday, June 8, 2010

आज क्या नया किया

आज क्या नया किया
आज ऐसा क्या किया
आज किस पहाड़ पे तूने
 निशां अपना गड़ दिया

आज क्या नया किया
मुश्किलों से  झूजते
ठोकरों के बीच भी क्या
सर उठा के  तू  जिया

आज क्या नया किया 
आंधीयों के बीच भी तूने
कौन सा दीया लौ किया 

कौन सा आंसू पी गया तू
कौन सा गम सह गया 
आज जिंदगी को क्या
तू जिंदगी की तरह जी गया