ए जिंदगी ऐसे मोड़ पे खड़ा हूँ
की हर तरफ रास्ते ही रास्ते दीखते है
कौन सा चुनु वो रास्ता
जो मुझे तेरी और ले जाए
हजारों सपनों की बीच एक सपना मेरा भी
रात भर पहरेदारी पर हूँ की कहीं
टूट ना जाये
नाम में क्या रखा है
हर तरफ बदनाम है शराब
माना की जिगर जलाती है पर गम भी तो जलते है
ख़राब ही सही
पर शराब जिंदगी जीना आसां करती है
लोग कहते है हमारी नज्म में प्यार नहीं छलकता
कैसे बताएं उनको की
आज भी हम आपके उस "हाँ " का इंतज़ार कर रहे है
words,alphabets, letters wandering freely in the world of languages,compositions, songs, poetry. Sometime making sense and most of the time needs lot of sense but in the end, it does stops you for a minute to read.
Wednesday, June 9, 2010
Tuesday, June 8, 2010
आज क्या नया किया
आज क्या नया किया
आज ऐसा क्या किया
आज किस पहाड़ पे तूने
निशां अपना गड़ दिया
आज क्या नया किया
मुश्किलों से झूजते
ठोकरों के बीच भी क्या
सर उठा के तू जिया
आज क्या नया किया
आंधीयों के बीच भी तूने
कौन सा दीया लौ किया
कौन सा आंसू पी गया तू
कौन सा गम सह गया
आज जिंदगी को क्या
तू जिंदगी की तरह जी गया
आज ऐसा क्या किया
आज किस पहाड़ पे तूने
निशां अपना गड़ दिया
आज क्या नया किया
मुश्किलों से झूजते
ठोकरों के बीच भी क्या
सर उठा के तू जिया
आज क्या नया किया
आंधीयों के बीच भी तूने
कौन सा दीया लौ किया
कौन सा आंसू पी गया तू
कौन सा गम सह गया
आज जिंदगी को क्या
तू जिंदगी की तरह जी गया
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