Tuesday, August 10, 2010

रात तेरा क्या है !

रात तेरा क्या है !
तू किसी को भी निगल सकती है 
कालिख पोत कर चहेरे पर
अपने में घुला सकती है 


तू चाहे तो क़दमों को बहका दे 
अँधेरे में ठोकर मार मंजिल से भटका दे 


रात तेरा क्या है !

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