एक रात की बात हुई
जब दुनिया से दूर
कुछ पल वो मेरे साथ हुई
सुबह से आँखों में एक साया था
पिछली रात का ख़वाब
खुमार बन के दिल दिमाग पर छाया था
मेरे संग चल पड़ी थी वो
मेरी हमसफ़र बन चली थी वो
सच में न सही, सपने में दो कदम बड चली थी वो
दिल बेचान था बात करने को
आखें बेचान थी उसे देखने को
एक जुस्तजू थी उसे गले लगाने को
शाम आई
साथ में कुछ पिछले जख्मों को कुरेद लाई
मेरी ख़ुशी के बीच उसे दर्द दे आई
पता चला मेरे दिल को, की
दस्तक इसने जहाँ दी
वहां अब भी कोई और बस्ता है
अब बेठे अपनी किस्मत पे हसंता है
मगर फिर भी ...
एक रात की बात हुई
जब दुनिया से दूर
कुछ पल को ही सही.... वो मेरे साथ हुई !