आज क्या नया किया
आज ऐसा क्या किया
आज किस पहाड़ पे तूने
निशां अपना गड़ दिया
आज क्या नया किया
मुश्किलों से झूजते
ठोकरों के बीच भी क्या
सर उठा के तू जिया
आज क्या नया किया
आंधीयों के बीच भी तूने
कौन सा दीया लौ किया
कौन सा आंसू पी गया तू
कौन सा गम सह गया
आज जिंदगी को क्या
तू जिंदगी की तरह जी गया
No comments:
Post a Comment